बुधवार, 3 जुलाई 2024

महिला सशक्तिकरण का उत्कृष्ट उदाहरण - देवी अहिल्याबाई होल्कर


महिला सशक्तिकरण का उत्कृष्ट उदाहरण - देवी अहिल्याबाई होल्कर (त्रिशताब्दी वर्ष)

आज भारत में, जहां महिलाएं जनसंख्या का लगभग 50% हिस्सा हैं, महिला सशक्तिकरण के सामाजिक-सांस्कृतिक, आर्थिक और राजनीतिक महत्व के विभिन्न आयाम हैं, जो राष्ट्र के समग्र विकास के लिए अत्यंत आवश्यक हैं। भारत में महिला सशक्तिकरण का इतिहास बहुत पुराना है। दुनिया भर में विभिन्न क्षेत्रों में महिलाओं की उपलब्धियों और योगदान को सम्मानित करने के लिए हर साल 8 मार्च को अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस मनाया जाता है।

पिछले दिनों मुझे अपने परिवार के साथ धार्मिक यात्रा के दौरान महेश्वर दर्शन और देवी अहिल्याबाई होल्कर की जीवनी के बारे में जानने का सुअवसर मिला। मैं बात करना चाहूंगी नर्मदा नदी के तट पर स्थित धार्मिक स्थल माहेश्वर, जो आज भी यह बताता है कि देवी अहिल्याबाई होल्कर के कुशल नेतृत्व में पूरा साम्राज्य कितना समृद्ध रहा होगा। देवी अहिल्याबाई होल्कर की जिनकी  त्रिशताब्दी का यह वर्ष है। देवी अहिल्याबाई होल्कर का चरित्र आधुनिक समाज में आदर्श है। उनकी जीवनी पढ़कर हमें पता चलता है कि विधवा होने के बाद भी एक अकेली महिला के लिए न केवल अपने साम्राज्य को संभालना, बल्कि उसका विस्तार करना और उसे एक अच्छा राज्य बनाना कितना चुनौतीपूर्ण रहा होगा। महेश्वर अपने उद्योग और पर्यटन के लिए विश्व प्रसिद्ध है 
महिला सशक्तिकरण के मुख्य घटक जिनमें शिक्षा, कौशल विकास, रोजगार आदि शामिल हैं, सभी उनके शासनकाल के दौरान देखे जा सकते हैं। देवी अहिल्याबाई ने अपनी प्रजा के लिए कई रोजगार के साधन, उद्योग इत्यादि बनाये जिसमे महेश्वर कपड़ा उद्योग आज भी चलता है
महेश्वरी साड़ियाँ विशेष रूप से प्रसिद्ध हैं। इन्हें गुजरात के 'मारू' और 'सालवी' बुनकरों ने शुरू किया था। माहेश्वरी कपड़े पर डिजाइन में पुष्प पैटर्न, धारियाँ और चेक शामिल हैं
देवी अहिल्याबाई सर्व समाज, विशेषकर किसान एवं पिछड़े वर्ग की हितकारी थी। उन्होंने अपने राज्य की कर प्रणाली को सुव्यवस्थित किया। ऐसे में संपूर्ण राज्य हर दृष्टि से सुराज्य था। उनके काल में खाद्य भंडारण की उचित व्यवस्था थी।
महिला सशक्तिकरण की बात आज हम करते हैं, लेकिन मातृशक्ति कितनी सशक्त है इसका अनुकरण करने लायक आदर्श देवी अहिल्याबाई की जीवनी उत्कृष्ट है। उन्होंने केवल अपने राज्य की चिंता नहीं की अपितु पूरे राष्ट्र की चिंता की। राज्य के लोग और समकालीन शासक उनके प्रति श्रद्धा और सम्मान रखते थे, जिसके कारण उन्हें देवी माँ कहा जाता था। 

राष्ट्र की संस्कृति को बचाने के लिए उन्होंने अनेक धार्मिक स्थलों (मंदिरों), नदियों पर घाट, धर्मशालाएं इत्यादि का निर्माण कराया। जहाँ आज भी अखंड ज्योत प्रज्वलित है। उनका मानना था कि "श्री शंकर कृपे करूण" अर्थात राज्य शिव भगवान की आज्ञा से चल रहा है। देवी ने अपने लिए कभी कुछ नहीं चाहा, उनका विश्वास था कि मुझे जो मिला है उससे अधिक की मैं हक़दारी नहीं हूँ और प्रजा के सुख से ज्यादा क्या हो सकता है कोटि लिंगार्चन इसका एक अंग है उनकी तस्वीर उनके साधारण जीवन को भी दर्शाती है। वह रानी नहीं अपितु देवी अहिल्याबाई बनकर बहुत सादगी से रहती थीं। इस प्रकार देवी प्रजा का पालन, राज्य की सुरक्षा, राज्य का संचालन, राष्ट्र की एकात्मता-अखंडता, सामाजिक समरसता सादगी के साथ करती थी।  

 इसी क्रम में आज भी वहां 11000 पार्थिव शिवलिंग का निर्माण एवं पूजा नित्य होती है। विशेषकर उनका धर्म के प्रति सच्ची श्रद्धा का जीता जागता उदाहरण आज भी वहां देखा जा सकता है। जनसुनवाई स्थल, भगवान शिव को बेहद प्रिय विशेष बेलपत्र इसके साक्ष्य है।

मैं देवी अहिल्याबाई होल्कर जी को उनके अद्वितीय महिला सशक्तिकरण त्रिशताब्दी वर्ष के लिए श्रद्धा सुमन अर्पित करती हूँ।
जय माहेश्वर, 
जय हिंद, भारत माता की जय

लेखिका, राजनीति विज्ञान में शोध कर रही है!

Regards,
सुमिता भींचर / Sumita Bhinchar 
भाजपा प्रत्याशी / BJP Candidate
विधानसभा क्षेत्र मकराना / Makrana Constituency (113)
संपर्क-9672178150, 7597467777, Contact- 9672178150, 7597467777


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